हार्दिक स्वागत् अभिनंदन .... सभी मौलिक सृजन है, कृपया स्नेहिल आशीर्वाद अवश्य प्रदान करें..परंतु किसी का रचना का तोड मरोड अन्यत्र प्रकाशित न करें..... जिंदगी मे कहाँ कौन कब जायेगा, साथ मे हैं तओ कुछ पल बिता लीजिये... अश्क
शनिवार, 19 नवंबर 2016
स्तुति - मुक्तक - हे नाथ विनय...
हे नाथ विनय बालक केरी सब मंगल काज सफल कीजै।
उत्फुल्ल रहे हर एक व्यक्ति सचराचर जहाँ सकल कीजै।
नित भोर से सांझ सुहावन हो मन द्रवित नही होने पाये,
उजडे बिछुडे इन पुष्पों को अब सुन्दर नाथ कमल कीजै।
--- अनुज कुमार गौतम 'अश्क'
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