बुधवार, 2 नवंबर 2016

ग़ज़ल - बेसबब भी कभी मुस्कुराया करो

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वजन/बहर - 212 212 212 212
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काफिया - आया
रफीद - करो
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मतला--
ख्वाब मे ही गले से लगाया करो।
बेसबब भी कभी मुस्कुराया करो।

शेर----
जिंदगी की हकीकत समझना है गर,
बारिशों में पतंगे उडाया करो।
देखते हैं तुम्हे आजकल लोग सब,
उनकी नजरों से खुद को बचाया करो।
मेरी खुशियाँ तेरे मुस्कराने से है,
खुद न रोया करो न रुलाया करो।
मै तिरे दिल मे हूं तु मिरे दिल मे है,
ऐरो गैरो से मत दिल लगाया करो।
गर सुनो जो खबर मेरे आने कि तो,
शाम से ही संवर बैठ जाया करो ।

मक़्ता--
लफ़्ज पढना अनुज के है आसान नहीं,
पढ कर इनको न आंशू बहाया करो।
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Copyright © akgautam_2016
---- अनुज कुमार गौतम 'अश्क'
सतना मध्यप्रदेश

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