शनिवार, 19 नवंबर 2016

गजल - साथ चलकर के देखो

मेरे रहनुमा साथ चलकर कर के देखो।
मिलो जब गले से तो लगकर के देखो।
मेरे दिल से बहती मोहब्बत की लहरें,
उसी लहर मे तुम उतर कर के देखो।
मेरी बात छोडो कि क्या कह रहा हूं,
खुद के भी दिल की सुनकर के देखो।
नही मन भरा चलते चलते जो देखा,
तो पल दो पलों तक ठहरकर के देखो।
अगर जानना है शराफत मेरी तब,
मेरे ही मकां से गुजर कर के देखो।
अगर चाहते हो हयात ए अश्क की,
तो गजलों में मेरी सिमटकर के देखो।

---- अनुज

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