बुधवार, 2 नवंबर 2016

मनहरण घनाक्षरी - दीपावली

"दीपावली"

मनहरण घनाक्षरी
8887 चार चरण
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काम क्रोध कर त्याग,
खुशियों के खोल द्वार,
दिल में एक प्यार का,
दीपक जलाइये।
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मन में उमंग रहे,
कुटुम्ब के संग रहे,
हर्ष उल्लास से आप,
दिवाली मनाइये।
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दीपकों की हो कतार,
बिजली भी हो अपार,
और गुलदस्ते बना,
घर को सजाइये।
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पूजा पाठ होम जाप,
दूर होवें कष्ट पाप,
खुशी खुशी आज आप,
पटाखे चलाइये।
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आप सभी को दीपोत्सव की अनंत शुभकामनाएं .....
आप सभी का जीवन सदैव दीपकों की रोशनी के साथ हर्षोल्लास से भरा रहे।
धन्यवाद

Copyright © akgautam_2016
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अनुज कुमार गौतम 'अश्क'
सतना मध्यप्रदेश
29 अक्टूबर को 04:20 अपरान्ह

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