*इस गजल को दिल से पढना, फिर एक बार सोचना...आंशू न आ जाये तो कहना*
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प्यार के भरोसे में हमने जिंदगी गुजारी है,
जिंदगी भी अपनी है मौत भी हमारी है।
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बचकर हम किधर जाये इस दर्द ए मोहब्बत से,
तेरे गोद मे सोने की हमे खास ए बिमारी है।
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माँ ने साथ छोडा था क्या कसूर मेरा था,
तुम भी दूर जाती हो ये दिल की मारामारी है।
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कर कुछ नही सकता झूठें तेरे वादों पर,
कल भी यही बातें थी आज वही जारी है।
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कह दो दुनियाँ वालों से हम भी इश्क करते हैं
वो बेवफा तुम्हारी थी ये बावफा हमारी है।
(बावफा - बेवफा का उल्टा मतलब अच्छी लडकी)
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तुमको प्यार करने को जो मिले दुनियाँ में,
छोड़ मुझे कर लेना ये बस यही होशियारी है।
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मुझसे रिश्ता तोड ही लिया फिर मुझे अब क्या कहना,
चाहे जिससे प्यार कीजिये अब ये जिंदगी तुम्हारी है।
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-- अनुज कुमार गौतम अश्क
-- Pt Anuj Kumar Gautam "अश़्क निर्मोही"
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