*गीत*
मनुज रो रो जीवन बिताया क्यो तुमने..
नमुमकिन से सपने सजाया क्यो तुमने....
ये दुनियाँ मे अपना कहाँ कौन होता।
जो ना दर्द होता तो कब कौन रोता।
गिले यार शिकवे दिखाया क्यों तुमने,
मनुज रो रो जीवन बिताया क्यूं तुमने।
इस दुनियाँ में पंछी हजारो तरह के।
मगर जी रहे है सब अपने करम से।
फिर रिश्तों से अाश लगाया क्यूं तुमने।
मनुज रो रो जीवन बिताया क्यूं तुमने।
सफर जिंदगी का समझकर जिये पर।
सदा से सभी कि फिकर तो किये पर ।
मगर मान अपना गंवाया क्यूं तुमने,
मनुज रो रो जीवन बिताया क्यूं तुमने।
अभी वक्त है तुम जरा सम्हल जाओ।
चलो खैर सफर खैर पथ बदल जाओ।
परिश्रम का पैसा कमाया जो तुमने।
सफल जिंदगानी बनाया फिर तुमने।
सरे आम खुलकर के रोया क्यूं तुमने।
मनुज रो रो जीवन बिताया क्यूं तुमने।
---अनुज कुमार गौतम
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