हार्दिक स्वागत् अभिनंदन .... सभी मौलिक सृजन है, कृपया स्नेहिल आशीर्वाद अवश्य प्रदान करें..परंतु किसी का रचना का तोड मरोड अन्यत्र प्रकाशित न करें..... जिंदगी मे कहाँ कौन कब जायेगा, साथ मे हैं तओ कुछ पल बिता लीजिये... अश्क
शनिवार, 19 नवंबर 2016
कता
मोहब्बत ए नज्र एक कता़
****
हो सुबह क्या गयी सब पंछी चहक मे खो गये।
वो गुलसिते मे जाकर महक ए गुलाब खो गये।
नाजुक ए हाल मयकदे मे देख सब चकरा गये,
यूं अपने ही हालात में हम भी फफक के रो गये।
***
कोई टिप्पणी नहीं:
एक टिप्पणी भेजें