गुरुवार, 3 नवंबर 2016

चौपाई छंद

चौपाई छंद
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गाँव लगे सबको अति प्यारा।
खुशमय बीते जीवन सारा॥
मिलकर रहते सब नर नारी।
सारे करते हैं श्रम भारी ॥
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शहर बना सुन्दर मनभावन।
उपवन लगता जैसा सावन।
छोड शहर को वापस आना।
सुखमय जीवन यहाँ बिताना।
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छोड शहर अब गांव पधारो।
सुखमय जीवन यहाँ सुधारो॥
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अनुज कुमार गौतम 'अश्क'
सतना मध्यप्रदेश

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