*आज राष्ट्रीय गृहणी दिवस (National Housewife Day) है, और नारी प्रगति का शीर्षक, इस पर एक प्रयास*
*_कविता_*
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नारी की महिमा बतलाऊं या उनकी प्रगति बखान कहूं।
जो मिला और मिल रहा राष्ट्र मे नारी का सम्मान कहूं।
शब्द सुमन मे मै बाँध सकूं यह मेरा है सामर्थ्य नहीं।
नारी प्रगति नही लिख पाऊं इतना भी असमर्थ्य नहीं।
देश कर रहा क्यों नारी का अतुलनीय सम्मान सदा।
नारी ने ही पथ दिखलाया आई हो चाहे जो विपदा।
नारी ने जोधाबाई बन कर अकबर को पथ दिखलाया था।
जीजाबाई ने अपने कौंशल से शिवा को वीर बनाया था।
देविशक्ति का लेकर स्वरुप देवों का साथ निभाया था।
रानी लक्ष्मी और पन्ना ने अद्भुत कौंशल दिखलाया था।
अब शोषण और गुलामी के वो दिन भी आखिर बीत गये।
अब प्रगति करेगी नारी और प्रतिदिन गायेगी गीत नये।
कब नारी पुरुषों से कम है और कहाँ नही है जा पायी।
बढी जा रही डोर प्रगति की जितनी भी बाधा आयी।
नारी ने अपने कौंशल से देश विदेश मे घूम लिया।
माउंट की चोटी पर चढकर अम्बर को भी चूम लिया।
और नारी भी सेना की वर्दी पहन कर पहरेदार हुयी।
राष्ट्र के खातिर मर मिटने का साहस ले कर तैयार हुयी।
पीढी दर पीढी प्रगति का नारी सचमुच आधार है।
मातृशक्ति बीते युग से नव युग तक का श्रृंगार है।
नारी शक्ति के हृदय बसा साहस भी अपरम्पार है।
प्रत्येक क्षेत्र मे ससम्मान पद पाना भी अधिकार है।
पुरुषों के संग कदम मिलाकर बढती जाती हैं आंगे।
आलौकिक कोई क्षेत्र नहीं जहाँ नारी स्वप्न नहीं जागे।
शासन और प्रशासन से प्रतिस्पर्द्धा तक हैं प्रतिभागी।
धरा से ले उन्मुक्त गगन तक नारी की प्रतिभा जागी।
कुल परिवार और देश का मान बढायी है नारी।
एक नही दो - दो मात्राएं नारी नर से भी भारी।
पहले रहती थी पर्दे मे अब प्रगति विवश वह लाज नहीं।
जो नारी का अपमान करे वो साक्षर सभ्य समाज नहीं।
नारी को शिक्षित होने दो और सम्मान बढाने दो।
मत समझो संस्कार मुक्त बस आंगे तो तक जाने दो।
यकीन करो एक दिन नारी खुशियों के तीर चलायेगी।
दया, प्रेम, श्रृंगार, शक्ति का मिश्रित नीर बहायेगी।
वह नीर कोई जल नीर नहीं वह देश उत्थान करायेगा।
नारी के संग पुरुषों को भी सम्मान समान दिलायेगा॥
चेतावनी - तोड मरोड अन्यत्र प्रकाशन वर्जित॥
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-- अनुज कुमार गौतम 'अश्क'
सतना मध्यप्रदेश
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