रविवार, 20 नवंबर 2016

नारी - अतुकांत

रही नारी बेचारी
सामाज की मारी
थी संस्कार में
बाधित नारी/
दौर आधुनिक
पर जो नारी
विवशताओं से
मुक्त है नारी
जागरुक और
सुशिक्षित नारी
देश को उज्जवल
कर रहीं नारी/
भेदभाव मुक्त
रहेगी नारी
देश की गरिमा
बनेगी नारी
तत्पर प्रगति
करेगी नारी
सीमा पर भी
रहेगी नारी
कोई भी पद
पाये नारी
अति सम्मान
दिलाये नारी
पुरुषों को भी
मात दी नारी
विपदाओं पर
साथ दी नारी
उत्कृष्ट रहे
जितना भी नारी
संस्कार मुक्त
नहीं हो नारी
तभी राष्ट्रहित
करेगी नारी
और सम्मानित
रहेगी नारी/
कुछ ऐसे भी
मुक्त है नारी
घर परिवार
रीति पे भारी
नये शिरे प
चलती नारी
संस्कार मुक्त
रहती नारी
ऐसी उपमा
पाये नारी
कुल घातक
बन जाये नारी।

- अनुज

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