आपकी मोहब्बतों के हवाले से मयखानों पर चंद मिसरे....
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आज किस खुशी में गुलाब बांट रहें हैं
हम भी आ गये सुना शराब बांट रहें हैं
भीड़ लग गयी मरीज ए मोहब्बतों की,
सुने दिल जोडनेकी किताब बांट रहे हैं
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मै मय-कदे की राह से गुजरना भी छोड दूं
तु कहे तो गिलास क्या बोतल भी फोड दूं
एक बार लग जा आके अगर गले से मेरे,
सिंगरेट शराब बीडी औ गुटका भी छोड दूं
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सुने शाकी को एक बार पढें।
मस्जिद को न बियरबार पढें।
मुद्दतों बाद आया खत उनका,
तो क्यो न वो हजार बार पढें।
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आप वेफजूल ये वहम् करते है,
जो कोई नही करता हम करते है।
जब भूल गये हो ठीक तरह से,
तो अब शराब पीना कम करते हैं
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--- अनुज कुमार गौतम 'अश्क'
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