गुरुवार, 3 नवंबर 2016

नज्म - शाम होने लगी

काफी दिनों बाद आप सबकी मोहब्बतों के हवाले एक नज़्म..
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शाम होने लगी, सूर्य ढलने लगे।
साथ मे अब हमारे वो चलने लगे॥
वो सुनाने लगे स्वर मधुर रात मे,
दिले दीपक सदा सुन के जलने लगे॥
देखकर साथ उनके मुझे लोग सब,
हांथ मे हांथ रखकर के मलने लगे।
जब भी करना पडा हो सफर मेरे बिन,
बात कहते अहद अश्क बहने लगे।
हम मिलें हैं हजारों दिनों बाद अब,
तन्हा रहने की बातें वो कहने लगे।
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अनुज कुमार गौतम 'अश्क'

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