काफी दिनों बाद आप सबकी मोहब्बतों के हवाले एक नज़्म..
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शाम होने लगी, सूर्य ढलने लगे।
साथ मे अब हमारे वो चलने लगे॥
वो सुनाने लगे स्वर मधुर रात मे,
दिले दीपक सदा सुन के जलने लगे॥
देखकर साथ उनके मुझे लोग सब,
हांथ मे हांथ रखकर के मलने लगे।
जब भी करना पडा हो सफर मेरे बिन,
बात कहते अहद अश्क बहने लगे।
हम मिलें हैं हजारों दिनों बाद अब,
तन्हा रहने की बातें वो कहने लगे।
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Copyright © akgautam_2016
अनुज कुमार गौतम 'अश्क'
हार्दिक स्वागत् अभिनंदन .... सभी मौलिक सृजन है, कृपया स्नेहिल आशीर्वाद अवश्य प्रदान करें..परंतु किसी का रचना का तोड मरोड अन्यत्र प्रकाशित न करें..... जिंदगी मे कहाँ कौन कब जायेगा, साथ मे हैं तओ कुछ पल बिता लीजिये... अश्क
गुरुवार, 3 नवंबर 2016
नज्म - शाम होने लगी
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