चार मिसरे ---
पहली बार जब अपने शहर से बाहर जाना हुआ, तो अचानक रेलवेस्टेशन ने बैठे फेसबुक ओर पोस्ट किया था....
---
आज सतना से यूं सूरत जा अकेला मै रहा।
शहर से पत्थर सरीखे जा ढकेला मै रहा।
सोचता था मै भी खुशियां साथ लेकर रह सकूं,
पर खुशी के आंगने बनकर झमेला मै रहा।
--
--आज शाम 6 बजे सतना से दमन एवं दीउ की यात्रा
---
Copyright © akgautam_2016
अनुज कुमार गौतम 'अश्क'
सतना मध्यप्रदेश
हार्दिक स्वागत् अभिनंदन .... सभी मौलिक सृजन है, कृपया स्नेहिल आशीर्वाद अवश्य प्रदान करें..परंतु किसी का रचना का तोड मरोड अन्यत्र प्रकाशित न करें..... जिंदगी मे कहाँ कौन कब जायेगा, साथ मे हैं तओ कुछ पल बिता लीजिये... अश्क
गुरुवार, 3 नवंबर 2016
गजल -
सदस्यता लें
टिप्पणियाँ भेजें (Atom)
कोई टिप्पणी नहीं:
एक टिप्पणी भेजें