गुरुवार, 3 नवंबर 2016

गजल -

चार मिसरे ---
पहली बार जब अपने शहर से बाहर जाना हुआ, तो अचानक रेलवेस्टेशन ने बैठे फेसबुक ओर पोस्ट किया था....
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आज सतना से यूं सूरत जा अकेला मै रहा।
शहर से पत्थर सरीखे जा ढकेला मै रहा।
सोचता था मै भी खुशियां साथ लेकर रह सकूं,
पर खुशी के आंगने बनकर झमेला मै रहा।
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--आज शाम 6 बजे सतना से दमन एवं दीउ की यात्रा
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अनुज कुमार गौतम 'अश्क'
सतना मध्यप्रदेश

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