अाप सबकी मोहब्बतों के हवाले एक गीत प्रस्तुत है...
"वर्षा ऋतु से सम्बंधित__हां मेरी रचनाओं मे मोहब्बत का जिक्र तो होता ही है" ___ आशीर्वाद चाहता हूं.....
--------------------------------
गीत,
घनघोर घटा नभ मे छाई
सुन्दर ऋतु अब बरषात चली...
शीतल सी हवा चली आई
खुशियों की है सौगात चली.....
अंतरा,
प्रभु सुन्दर वायु बहाय रहे
छाये ऊपर सुन्दर मेघा
घन आपस में टकराय रहे
चहुंदिसि में करते स्वर मेघा
खिल खिल खिलाय सब सखी हंसी, संग लेकर के बारात चली....
खत पाती है प्रिय आने का
मन में उमंग छा जाती है
सुन्दर स्वर गीत सुनाने का
मन ही मन में मुस्काती है
प्रिय देख द्वार से आय रहे, कजरी सावन की गात चली.....
सखियों संग उपवन जाकर के
करती प्रिय को मनुहार सखी
कोयल बुलबुल को सुनकर के
गाती है मेंह मल्हार सकी।
प्रिय के संग चल मन मे उमंग, सखियों के संग मुस्कात चली....
--------------------
Copyright © akgautam_2016
अनुज कुमार गौतम 'अश्क'
सतना मध्यप्रदेश
कोई टिप्पणी नहीं:
एक टिप्पणी भेजें